
GST करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश एसआईटी की बड़ी कार्रवाई में दो और गिरफ्तार
नेटवर्क सरगना की तलाश में लकी पुलिस
मास्टर युग ✍️
मुरादाबाद। राज्य कर विभाग और अपराध शाखा की संयुक्त जांच में करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी से जुड़े एक संगठित फर्जी बिलिंग रैकेट का पर्दाफाश किया है एसआईटी (अपराध शाखा मुरादाबाद) ने इस पूरे गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में दबिश जारी है।
जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई राज्य कर जीएसटी विभाग के कमिश्नर ग्रेड 1 अशोक कुमार सिंह एवं अपर आयुक्त ग्रेड 2 एसआईबी आर ए सेठ के निर्देश पर दर्ज कराई गई शिकायत के बाद शुरू हुई। सहायक आयुक्त राज्य कर खंड- 4 दुष्यंत द्वारा थाना मझोला में एक फर्जी फर्म के संचालन को लेकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ‘मास नेशनल ट्रेडर्स’ नाम की फर्म केवल कागजों पर संचालित की जा रही थी और इसका वास्तविक
व्यापारिक अस्तित्व नहीं था। इस फर्जी फर्म के जरिए केवल बिल तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की हेराफेरी की जा रही थी, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया। मामला गंभीर होने पर दिनांक 11 अप्रैल 2026 को थाना मझोला में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया, जिसके बाद विवेचना में अतिरिक्त धाराओं की भी वृद्धि की गई।
एसपी क्राइम ब्रांच सुभाष चंद्र गगवार और क्षेत्राधिकारी क्राइम ब्रांच वरुण कुमार के निर्देशन में गठित एसआईटी
टीम ने तकनीकी जांच, बैंक लेनदेन, डिजिटल साक्ष्य और खुफिया इनपुट के आधार पर पूरे नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कीं। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि यह केवल एक फर्म का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह है जो फर्जी बिलिंग के जरिए कर चोरी को अंजाम दे रहा था। एसआईटी ने कार्रवाई करते हुए मोहम्मद फैजल निवासी सैनी वाली गली, किसरौल, थाना नागफनी, मुरादाबाद (उम्र 38 वर्ष) तथा शाहनवाज निवासी गुलर वाली गली, खैर नगर, थाना देहली गेट, जनपद मेरठ (उम्र 44 वर्ष) को
गिरफ्तार किया। दोनों से पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
जांच में सामने आया कि इस पूरे फर्जीवाड़े की साजिश में ‘मास नेशनल ट्रेडर्स’ फर्म को प्रोपराइटर रवि कुमार के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर तैयार किया गया था। इसके अलावा ‘अरहान ट्रेडर्स’ नाम की दूसरी फर्जी फर्म भी इसी नेटवर्क का हिस्सा पाई गई, जो मोहम्मद फैजल के नाम पर दर्ज थी। पूछताछ में खुलासा हुआ कि शाहनवाज इस पूरे गिरोह का मुख्य संचालक है, जो लंबे समय से जीएसटी बिलिंग और टैक्स क्रेडिट हेराफेरी के अवैध धंधे में सक्रिय रहा है। उसने अपने सहयोगी ईशान मलिक के साथ मिलकर मेरठ और दिल्ली के कई व्यापारिक नेटवर्क से संपर्क स्थापित किया और फर्जी बिलिंग का जाल तैयार किया। गिरोह द्वारा उमैमा हैंडीक्राफ्ट, नाजिम सन्स, जीलानी ट्रेडर्स और अल अर्श जैसे नामों का उपयोग कर फर्जी लेनदेन दिखाया गया, जबकि वास्तविक रूप से किसी भी प्रकार की वस्तु का आदान-प्रदान नहीं
हुआ। केवल कागजों पर खरीद-फरोख्त दर्शाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का अवैध लाभ उठाया जाता था। जांच में यह भी सम सामने आया कि फर्जी बिलिंग से प्राप्त टी राशि को बैंक खातों और नकद लेनदेन देने के माध्यम से आपस में बांट लिया जाता टी था। यह पूरा नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और सुनियोजित तरीके से में कर चोरी कर रहा था।
हुए पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल दो गिरफ्तार अ आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई राज्यों तक फैले हुए हैं। एसआईटी अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, फर्जी फर्मों और जुड़े व्यक्तियों की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले इस प्रकार के दि संगठित आर्थिक अपराधों को किसी भी लो कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा के और सभी दोषियों पर कठोर कार्रवाई एक सुनिश्चित की जाएगी। जांच टीम अन्य में संदिग्धों की पहचान कर जल्द ही और उन सब की गिरफ्तारियां करने की तैयारी में है।
